Sunday, 16 June 2013

एक टुकड़ा चांद..एक टुकड़ा नदी..
और कुछ चांदनी की बात..
एक टुकड़ा ख़ुशी..एक टुकड़ा गम..
और कुछ जिन्दगी की बात..
एक टुकड़ा मैं..एक टुकड़ा तुम..
और कुछ आशिकी की बात..
एक टुकड़ा वक़्त..एक टुकड़ा तकदीर..
और कुछ आवारगी की बात..
एक टुकड़ा वफ़ा..एक टुकड़ा तन्हाई..
और कुछ दीवानगी की बात..
एक टुकड़ा जमीं..एक टुकड़ा आसमाँ..
और कुछ तिश्नगी की बात..

-
सुचित 
ऐसे थोड़े होता है..
प्यार कोई फेसबुकिया बहस थोड़े है..
मूड मौका देख कर..
हुयी हुयी न हुयी..
मैं,किसी प्रियजन द्वारा जबरदस्ती tag की तस्वीर नहीं..
जिसे खीझे मन से like करो..
न मैं बहुमत समर्थित पोस्ट पर असहमति का comment..
जिसे लोकतान्त्रिक मूल्यों के नाम पर..
अनमने भाव से appreciate करना पड़े तुम्हे..
मैं नहीं तुम्हारी profile pic या cover photo..
जो वक़्त के साथ बदल जाये..
मैं तो बस रहना चाहता हूँ..
तुम्हारे फेसबुक login का email..
छुपा..और अपरिहार्य..
तुम्हारे लिए..जब तुम्हे जरूरत हो मेरी..
बस इतना करना..log in id change मत करना ..

- सुचित

Saturday, 6 October 2012


रात काटना और बात है,सुबह होना और बात..

बेखुदी का आलम और बात है,चैन की नींद और बात..



गम भी मुस्कुराने की वजह बनता है कभी कभी ..

गम का होना और बात है,दर्द का होना और बात..



जिन्दगी हो मगर उसका एहसास न हो..

सांसे चलना और बात है,जिन्दा होना और बात..



धड़कन इस कदर खामोश की दिल बेजान लगे..


दिल का धडकना और बात है,ज़स्बात उमड़ना और बात..


जिन्दगी में कभी कुछ मिल के भी नहीं मिलता..
 
तेरा 'होना' और बात है,मेरा होना और बात..

                                         - सुचित